गोरखपुर, जून 28 -- गोरखपुर। प्रमुख संवाददाता। एक पिता ने जिस बेटे को अपना नाम दिया, उसे नशे की लत से बचाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया, लेकिन नियति का ऐसा क्रूर खेल हुआ कि पिता की मौत के बाद भी बेटा अंतिम दर्शन नहीं कर सका। आरोप है कि नशा मुक्ति केंद्र ने 20 महीने का दो लाख रुपये से अधिक बकाया शुल्क जमा न होने के कारण युवक को कुछ घंटों के लिए भी नहीं छोड़ा। आखिरकार 84 वर्षीय बुजुर्ग की अर्थी उनके भाई के परिवार ने उठाई और अंतिम संस्कार भी उसी ने किया。

बुजुर्ग का जीवन चिलुआताल थाना क्षेत्र के गायत्रीनगर निवासी बुजुर्ग मूल रूप से बेलीपार क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले थे। करीब 30 वर्ष पहले उन्होंने यहां मकान बनवाकर जीवन बसाया था। पत्नी शिक्षिका थीं, जिनका पांच वर्ष पहले निधन हो गया। संतान न होने पर उन्होंने रिश्तेदारी के एक यु...