पिता का दर्जा पर्वत से भी ऊंचा, समर्पण करने वालों को ही याद रखती है दुनिया : आचार्य कुलदीप
बिजनौर, जून 10 -- ग्राम झाल-उलेढ़ा स्थित सुप्रसिद्ध सती माता मंदिर के प्रांगण में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा व्यास आचार्य कुलदीप महाराज ने भगवान श्री राम के वनवास और उनके आदर्शों का मर्मस्पर्शी वर्णन कर पंडाल में मौजूद सभी भक्तों को भावविभोर कर दिया।
कथा का प्रसंग कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आचार्य कुलदीप महाराज ने कहा कि जब अयोध्या की सभा में श्री राम के राज्याभिषेक की घोषणा हुई, तो पूरी अयोध्या नगरी आनंद और उत्सव में डूब गई। राजा दशरथ की कर्तव्यनिष्ठा में देशप्रेम छुपा हुआ था। लेकिन, श्री राम से अगाध प्रेम करने वाली माता कैकेयी को उनकी दासी मंथरा ने अपने कुटिल विचारों से भ्रमित कर दिया। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से पूर्व में मिले दो वरदान मांग लिए। ...
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