मुजफ्फरपुर, फरवरी 3 -- मुजफ्फरपुर, वसं। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के नवजात शिशुओं की सुरक्षा और देखभाल के लिए स्थापित पालना घर कागजों में मॉडल सुविधा वाला है, लेकिन जमीन पर निगरानी में कमी खटकती है। कहीं लापरवाही, तो कहीं स्टाफ की कमी सामने आई। समाहरणालय, पुलिस लाइन व केंद्रीय कारा कैंपस में पलना घर का इंतजाम महिला एवं बाल विकास निगम की ओर से किया गया है। चौथा जीविका की ओर से बेला में है, लेकिन छह माह चलने के बाद ही वह बंद हो गया। इन पालना घरों में साफ-सफाई के मानकों का नियमित पालन भी नहीं दिखा। स्वास्थ्य जांच में ढिलाई, नवजात को पालना घर में रखने से पहले और बाद में तत्काल मेडिकल स्क्रीनिंग करना होता है। शिशु का वजन, तापमान व संक्रमण जांच के साथ उसका टीकाकरण व फॉलोअप अनिवार्य होता है। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं होता। समाहरणालय वाले पा...