गढ़वा, मई 24 -- धुरकी, प्रतिनिधि। आधुनिकता और मशीनों के दौर में पारंपरिक तरीके से बनाए जाने वाले मिट्टी के बर्तन अपनी उपयोगिता और सौंदर्य के कारण आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं। इसी परंपरा को जीवित रखे हुए हैं थानांतर्गत सगमा गांव के कारीगर बलराम प्रजापति। वह वर्षों से मिट्टी के बर्तन बनाकर अपनी कला और संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। बलराम बताते हैं कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम होता आ रहा है। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता और दादा को चाक पर काम करते देखा और धीरे-धीरे यही कला उनकी पहचान बन गई। वह कहते हैं कि मिट्टी के घड़े, सुराही, दीये, कुल्हड़ और हांडी सिर्फ उपयोग की वस्तुएं नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और ग्रामीण जीवन की आत्मा हैं। उन्होंने बताया कि आज भी गांवों में लोग गर्मियों में मिट्टी के घड़े का ...