मुजफ्फर नगर, नवम्बर 19 -- तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित प्राचीन दंडी आश्रम में ब्रहमलीन स्वामी गुरु देवेशवराश्रम महाराज के चतुर्थ निर्वाण महोत्सव पर आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह के छठे दिन प्रयागराज से आए प्रसिद्ध कथा वाचक सर्वेशप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि पाप और पुण्य दोनों हमारे अपने ही बनाए हुए मार्ग हैं। पाप हमें बंधन में डालता है और पुण्य हमें प्रकाश की ओर ले जाता है। परंतु सबसे महान है भगवान की भक्ति, जो पापों को भस्म कर देती है और मनुष्य को जीवन के परम लक्ष्य भगवत प्राप्ति की ओर ले जाती है। पाप और पुण्य वही कर्म हैं जो मनुष्य के भीतर छिपे हुए संस्कारों का परिणाम होते हैं। जब मन में दया, करुणा, अहिंसा, सत्य और प्रेम जैसे गुण जाग्रत होते हैं, तब पुण्य जन्म लेता है और जब मन में क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और हिंसा का उदय होता है, तब पाप बढ़ता...
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