नई दिल्ली, अप्रैल 28 -- अफ्रीकी देश चाड में पानी के लिए दो समूहों के बीच हुई हिंसक लड़ाई में चालीस से अधिक लोगों की मौत दुखद तो है ही, दुनिया को आगाह करने वाली भी है। जैसे कि ब्योरे हैं, चाड के वादी फिरा प्रांत में एक जल-स्रोत पर कब्जे को लेकर शुरू हुई झड़प देखते-देखते हिंसक प्रतिशोध में बदल गई और लाशों का ढेर लगता गया। पहली नजर में यह लग सकता है कि चाड एक नाकाम मुल्क है, जहां व्यवस्था काम नहीं करती है। उसका समाज इस दौर में भी इंसानी जान की अहमियत नहीं समझ सका है, मगर बात इतनी ही नहीं है। अनाज व जल इंसान के अस्तित्व की दो मूल अनिवार्यताएं हैं और अनिवार्यता का कोई विकल्प नहीं होता। ठीक वैसे ही, जैसे सांस का कोई विकल्प नहीं है। इसलिए, इस घटना को बर्बर समाजों के मूढ़तापूर्ण कृत्य के रूप में देखना आसन्न विपत्ति से मुंह मोड़ना कहलाएगा। चाड में...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.