नई दिल्ली, जुलाई 30 -- सुशांत सरीन,सीनियर फेलो, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी हुक्मरान के खिलाफ जो गुस्सा दिख रहा है, वह अप्रत्याशित है। वहां सब्सिडी खत्म करने के विरोध में शुरू हुआ जनांदोलन अब आजादी की मांग में बदल चुका है। जवाब में, पाकिस्तान सरकार का दमन जारी है। गुजरे तीन दिनों में 30 से अधिक और 5 जून के बाद से 90 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के कत्ल के आरोप उस पर लग रहे हैं। आंदोलनकारियों में सत्ता-विरोधी भावना उबाल पर है। वे खुलकर पाकिस्तानी हुकूमत व फौज से टकरा रहे हैं। शासक और शासित के बीच रिश्तों में ऐसी दरार पड़ चुकी है, जिसे भरना पाकिस्तान सरकार के लिए आसान नहीं होगा। इस आंदोलन के दो अहम पहलू हैं, जिसे पाकिस्तान नजरंदाज कर रहा है। पहला, वहां के हुक्मरान बलूचिस्तान में ताे कत्लेआम कर सकते ह...