रामपुर, जुलाई 23 -- जौहर यूनिवर्सिटी के जरिए युवा मतदाताओं को साधने की कोशिश या मुस्लिम वोट बैंक को और मजबूत बनाने की कवायद..., वजह जो भी हो लेकिन, यह पहला मौका है कि आजम के बुरे वक्त में सपा इतनी शिद्दत के साथ खड़ी है। शहर की सियासी गलियों में सपा की इतनी हमदर्दी को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गरम है। यूं तो आजम खां का बुरा वक्त तभी शुरू हो गया था जब 2017 में यूपी में सत्ता परिवर्तन हुआ था लेकिन, कानूनी शिकंजा 2019 से कसा गया। एक के बाद एक मुकदमे हुए, हालात ये हो गए कि मुकदमों का शतक बन गया। आजम परिवार के साथ जेल चले गए। इतना सब कुछ होने पर भी जब सपा हाईकमान में कोई हलचल नहीं हुई तो सोशल मीडिया पर आजम के लोगों ने अखिलेश यादव की घेराबंदी शुरू कर दी थी। 2022 के चुनाव से पहले इतनी लामबंदी हो गई थी कि रिश्ते मीडिया की सुर्खियों में रहे थ...