जयपुर, जून 30 -- कभी चंबल के बीहड़ों में बंदूक के दम पर अपना कानून चलाने वाला डाकू जगन गुर्जर अब सिर्फ एक फाइल, एक आपराधिक इतिहास और एक अधूरी कहानी बनकर रह गया है। 29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में उसकी हत्या के साथ उस शख्स का अंत हो गया, जिसका नाम तीन राज्यों की पुलिस के लिए सालों तक चुनौती बना रहा। यह वही जगन गुर्जर था, जिसके एनकाउंटर की मांग देश की संसद तक पहुंची थी। लेकिन विडंबना देखिए, जो कभी लाखों के इनामी डाकू के रूप में पहचाना जाता था, वही बाद के वर्षों में 3 रुपए के खुले पैसों और पंचर ठीक से नहीं बनाने जैसी मामूली बातों पर झगड़ा करने लगा था।पंडित का बेटा कैसे बन गया चंबल का डाकू जगन गुर्जर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही। धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के भवुतीपुरा गांव में जन्मे जगन का बचपन बेहद साधारण था। उस...