लखनऊ, फरवरी 21 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से अनिल सिन्हा स्मृति व्याख्यान के तहत अस्मिता विमर्श: साहित्य, समाज और राजनीति विषय पर परिचर्चा प्रेस क्लब में हुई। मुख्य वक्ता डॉ रामायन राम ने कहा कि अस्मिता या पहचान का विमर्श हमारे दौर का सबसे बहस तलब विषय है। अस्मिता के विचार ने समाज, राजनीति और साहित्य में पिछले तीन चार दशकों में बहुत जोड़ा घटाया है। यह एक ऐसा विचार है जिसको अपना कहने वाला कोई नहीं है। डॉ. रामायन ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि पहचानों के उभरने का परिणाम वर्गीय एकता और बुनियादी बदलाव के सिद्धांत का निषेध है। इसके उलट पहचान आधारित समूह अपने विचार को बुनियादी और सार्वभौमिक होने का दावा भी करते हैं। इसलिए उन्हें अस्मिता विमर्श में सीमित किया जाना सही नहीं लगता। इस विमर्श के पीछे भौतिक कारण है। समाज मे...
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