दिल्ली, मार्च 11 -- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे पर हुए विवाद, राज्यपाल को बदला जाना और चुनाव आयोग की टीम के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के बाद इन अटकलों को और बल मिला है.पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन का कोई लंबा इतिहास नहीं रहा है.इससे पहले 30 अप्रैल 1977 को केंद्र ने तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था, जो वाममोर्चा सरकार के शपथ ग्रहण तक 52 दिनों तक जारी रहा था.एसआईआर पर बंगाल सरकार और चुनाव आयोग में टकराव चरम परउस घटना के 49 साल बाद अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या बंगाल एक बार फिर राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है? मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल सात मई तक है.अगर तब तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होकर नई सरकार का गठन नहीं हुआ तो...
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