नई दिल्ली, अप्रैल 11 -- हमारे कुछ हिन्दुस्तानी साथियों को इस बात से तकलीफ है कि इस्लामाबाद पश्चिम एशिया की जंग पर 'मध्यस्थता' क्यों कर रहा है! वे नहीं जानते कि पाकिस्तान उसी काम को अंजाम दे रहा है, जिसके लिए उसे रचा गया था। इस तथ्य को जानने और समझने के लिए हमें आजादी से पहले के दिनों में लौटना होगा। पाकिस्तान कोई आदिकालिक विचार नहीं है। इस शब्द का पहली बार प्रयोग कैम्ब्रिज में अध्ययनरत चौधरी रहमत अली ने सन् 1933 में किया था। शुरू में किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन बाद में अल्लामा इकबाल ने इसे भावनात्मक और मोहम्मद अली 'जिन्ना' ने राजनीतिक कलेवर प्रदान कर दिया। कहते हैं कि जिन्ना के गले में इस ख्वाब की माला डालने वाली ब्रिटिश हुकूमत थी। ऐसा न होता, तो भला यह कहां संभव था कि सिर्फ 14 बरस में हजारों साल पुराने राष्ट्र-राज्य के दो टुक...