बागेश्वर, अप्रैल 20 -- देवेंद्र पांडे, बागेश्वर। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने सोमवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में गढ़वाल और कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों को भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई। मोर्चा पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्वरूप जनजातीय क्षेत्रों के अनुरूप है, इसलिए इन्हें संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश काल में वर्ष 1815 से 1874 के बीच इन क्षेत्रों को 'गैर-विनियमित क्षेत्र' घोषित कर विशेष प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई थी। बाद में इन्हें 'बहिष्कृत' और 'अर्ध-बहिष्कृत' क्षेत्रों की श्रेणी में रखा गया, जहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार शासन संचालित होता था। प्रेस वार्ता में कहा गया कि प्रदेश का लगभग 80 प्रत...