संतकबीरनगर, जून 6 -- संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में पर्यावरण संरक्षण का प्रयास पौधरोपण तक सीमित रह गया है। धरातल पर संरक्षण को लेकर हो रहे प्रयास अंजाम तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। हर तरफ पर्यावरण प्रदूषण फैलाने का कार्य हो रहा है। पर्यावरण के लिए सबसे अधिक खतरा प्लास्टिक का कचरा है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर कोई रोक नहीं लग पा रही है। जैविक कचरा सड़कर मिट्टी में मिल जाता है। वहीं प्लास्टिक उपयोगा में आने के बाद कचरे के साथ पर्यावरण में लंबे समय तक बना रहता है। जिससे मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषण होता है। इतना ही नहीं प्लास्टिक के प्रदूषण से लोगों को अब सांस की बीमारी हो रही है। शहर से हर दिन 12 टन से अधिक कचरा निकल रहा है। इसमें काफी मात्रा में प्लास्टिक कचरा शामिल रहता है। यह भी पढ़ें- जिले में बढ़ा हरियाली का दायरा, छांव की ...