नई दिल्ली, मई 11 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कनिष्ठ न्यायिक सहायक परीक्षा से जुड़े मामले में कहा है कि पाठ्यक्रम से बाहर पाए गए और बाद में हटाए गए प्रश्नों के लिए अभ्यर्थियों को स्वतः फ्री अंक देने का कोई अधिकार नहीं बनता। न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव एवं न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका खारिज कर दी। याचिका में परीक्षा मूल्यांकन पद्धति को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता दिल्ली उच्च न्यायालय में चालक व कोर्ट अटेंडेंट जैसे ग्रुप सी पदों पर कार्यरत कर्मचारी हैं। उन्होंने कनिष्ठ न्यायिक सहायक व अन्य 71 पदों के लिए आयोजित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में हिस्सा लिया था। मामला उस समय विवाद में आया जब परीक्षा प्रकोष्ठ ने लिखित परीक्षा के कुछ प्रश्नों को पाठ्यक्रम से बाहर पाया। सामान्य ...