परिवार दिवस विशेष: अपने हुए पराए, आश्रम में बिता रहे जिंदगी का आखरी पड़ाव
मेरठ, मई 15 -- माता-पिता अपने बच्चों को अपनी हैसियत से बढ़कर संघर्ष करते हुए पाल-पोश कर बड़ा करते हैं। जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तब वह माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर उन्हें दरकिनार करने लगते हैं। अब सामान्यत: परिवार सिंगल होता जा रहा है। पति-पत्नी और बच्चे। अब यही परिवार होने लगा है। यह भी पढ़ें- 65 वर्षीय वृद्धा के हाथ में परिवार के 28 सदस्यों की कमानआश्रय की स्थिति गंगानगर डिवाइडर रोड स्थित दादा-दादी वृद्धजन निवास आश्रम पिछले दस वर्षों से संचालित है। यहां अपनों की बेरूखी का शिकार हुए बुजुर्ग अपने जीवन का आखरी पड़ाव बेबसी के साथ जी रहे हैं। आश्रम की संचालिका नम्रता शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में 35 बुजुर्ग महिला और पुरूष रह रहे हैं, जिसमें प्रयागराज, बेगुसराय, गया, अयोध्या, बिहार, बुलंदशहर समेत अन्य जगहों के बुजुर्ग शामिल...
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