मोतिहारी, जून 25 -- सुगौली। सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहहु मुनिनाथ, हानि-लाभ जीवन मरण, जस अपजस विधि के हाथ, महान कवि तुलसी की यह पक्तियां जीवन में होनीRs.-अनहोनी की सच्चाई को सटीकता से दर्शाती है। यह पक्ति छपवा-बेतिया मुख्य मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में टेंपो चालक भैरो राउत की मौत की अनहोनी पर सटीक बैठती है। एक तरफ मृतक की मां उमा देवी परिवार की सलामती की कामना लेकर पड़ोसियों के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाराणसी गई हुई हैं। वहीं, उनका भैरो बुधवार को काल के गाल में समा चुका है। उस मां को अब तक यह भान तक नहीं है कि उनका भैरो अब अनंत यात्रा पर निकल चुका है। दरअसल, भैरो राउत कर्ज लेकर खरीदे गए टेंपो को चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी कमाई से ही मां, पत्नी प्रमिला देवी और दो छोटी बेटियों नयना व सुहानी का जीवन बसर...