शामली, अक्टूबर 27 -- शहर के जैन धर्मशाला में रविवार को मुनिराजों के पिच्छिका परिवर्तन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में श्री 108 विव्रत सागर मुनिराज ने अपने प्रवचन में आध्यात्मिक महत्व एवं सचेत परिवर्तन की आवश्यकता पर गहन विचार प्रस्तुत किए। मुनिराज ने कहा कि संसार में प्रत्येक द्रव्य प्रति क्षण परिवर्तनशील है। यदि परिवर्तन न हो, तो पूरा जगत स्थिर और गतिहीन हो जाएगा। यही स्वाभाविक परिवर्तन जीव को कष्टप्रद योनियों से निकालकर विभिन्न पर्यायों की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि भक्त जब बार-बार गुरु के चरणों में समान उत्साह से समर्पित होता है, तो यह परिवर्तन की सच्ची शक्ति को दर्शाता है। बताया कि अनंत जन्मों और चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करने के बाद भी जीव को अभी सिद्धगति प्राप्त नहीं हुई, जो संपूर्ण दुखों और जन्म-मृत्यु से मुक्त ह...
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