परसरा के नौ रणबांकुरों की आज भी सुनाई जाती है अमर गाथा
गंगापार, अगस्त 13 -- घूरपुर, हिन्दुस्तान संवाद। गोरे फिरिंगियों से आजादी के लिए देश के कोने कोने से वीर जवानों की टोली निकली थी। सन 1945 में जसरा के परसरा गांव निवासी मिडिल पास युवक दीनबंधु पाठक भी देश को अंग्रेजी हुकूमत से मुक्त कराने के लिए अकेले गांव से निकल पड़े।दीनबंधु पाठक की देश भक्ति देख गांव के रामचन्द्र पाठक, यशोदा नंद पांडेय, जगदीश प्रसाद ओझा, इंद्रजीत सिंह, रामदुलारे पांडेय, राघव प्रसाद पांडेय, गुरुदीन स्वर्णकार और सत्यनारायण पांडेय का भी देश के प्रति खून खौल गया। सभी टोली बनाकर घर से मां भारती की आजादी के लिए निकल पड़े। घर से निकलते ही शहर पहुंचने वाले थे कि इन्हें गोरे फिरिंगियो ने पकड़ लिया और बुरी तरह से प्रताड़ित करते हुए मलाक हरहर की जेल में ठूंस दिया गया। यह भी पढ़ें- आजादी के दीवाने राजाराम ने साढ़े चार साल काटी जेल वहां...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.