प्रतापगढ़ - कुंडा, मार्च 11 -- कुंडा, संवाददाता। मानव आनंद की खोज में सुबह से शाम तक भटकता है, वह भौतिक वस्तुओं में आनंद खोजता है। जबकि असली आनंद तो भगवान की शरण में है। परमानंद पाने को भगवान की शरणागति आवश्यक है। यह बातें मिरिया गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य संतोष ने कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करने से ही आनंद मिल सकता है। श्रीमद्भागवत पुराण भी भगवान श्रीकृष्ण का ही स्वरुप है। भागवत कथा सुनने मात्र से मानव के पाप धुल जाते हैं। आचार्य ने महाभारत कथा, परीक्षित जन्म, हिरण्याक्ष वध, मनु कर्दप संवाद सुनाया। श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा की मधुर संकीर्तन से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस मौके पर रामबाबू त्रिपाठी, प्रभावती त्रिपाठी, मनोज कुमार, राधा कान्त त्रिपाठी, संतोष मिश्र...