नई दिल्ली, जुलाई 22 -- पश्चिम एशिया में जारी घातक युद्ध के बीच वहां हो रहा एक परमाणु समझौता बहुत व्यापक महत्व रखता है। अगर अचानक कोई बदलाव न हुआ, तो अमेरिका और सऊदी अरब के बीच असैन्य परमाणु समझौता लागू हो जाएगा। सऊदी अरब वर्षों से परमाणु शक्ति बनने के लिए लालायित है। उसका सबसे निकटतम सहयोगी अमेरिका भी इजरायल के मोह में यह नहीं चाहता था कि रणनीतिक रूप से काफी संवेदनशील सऊदी अरब परमाणु शक्ति अर्जित कर ले। ध्यान रहे, यह समझौता परमाणु बम बनाने के लिए नहीं, परमाणु ऊर्जा के लिए हो रहा है। भारत सहित करीब 26 देशों के साथ अमेरिका समझौता कर चुका है। यह नागरिक परमाणु समझौता ऐसा तरीका है, जो विश्व स्तर पर शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा पर सहयोग की अनुमति देता है। अमेरिका अब सऊदी अरब में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण, परमाणु ईंधन आपूर्ति, रिएक्टर प्रौद्य...