गिरडीह, मई 12 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। भूमि की उर्वरता का आकलन फसलों से किया जाता है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य के आचरण से संस्कार का पता लगता है। व्यक्ति का आचरण ही उसकी वास्तविक पहचान है। केवल नाम में जैन रहने से पहचान नहीं बनती, बल्कि व्यवहार और चरित्र में जैनत्व झलकना चाहिए। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और परंपरा को कभी न खोएं, बल्कि अपने आचरण में ऐसे संस्कार स्थापित करें कि लोगों को आपके जीवन में कुलाचार की झलक दिखाई दे। उक्त बातें मधुबन में साधनारत मुनि प्रमाण सागर जी महाराज प्रवचन सभा में कही। मुनि प्रमाण सागर जी महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की मन की शंका दूर करते हुए कहा कि जिस परिवार और वंश में पीढ़ियों से अहिंसा, शुद्ध आहार और संयम की परंपरा रही हो, वही उसका कुलाचार है। मुनि श्री ने कहा कि ज...