गोरखपुर, अगस्त 15 -- गोरखपुर, राजीव दत्त पाण्डेय। साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं पद्मश्री प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि पद्मश्री डॉ. रामदरश मिश्र का व्यक्तित्व सांख्य दर्शन के पंचमहाभूतों में से 'जल तत्व' के समान था। जल रहस्यमय और आकर्षक होने के साथ-साथ सहज, सरल और जीवनदायी होता है। रामदरश मिश्र का जीवन और साहित्य भी इसी जल तत्व की तरह स्वाभाविक, निर्मल और आत्मीय रहा।रामदरश मिश्र की 103वीं जयंती प्रोफेसर तिवारी, शुक्रवार को पद्मश्री रामदरश मिश्र की 103वीं जयंती की पूर्व संध्या पर रामदरश मिश्र न्यास, भारतीय हिन्दी प्राध्यापक परिषद एवं अखिल भारतीय भाग्य महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में रानापार में आयोजित 'रामदरश मिश्र के साहित्य में जल, जवार और जीवन के प्रश्न' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्...