शिमला, अक्टूबर 27 -- पत्नी हर महीने करीब 15 हजार रुपये कमा रही है, इसके बावजूद पति को उसे गुजारा भत्ता देना होगा। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि पत्नी की अस्थायी नौकरी और उससे होने वाली आमदनी के आधार पर पति को भरण-पोषण की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने पत्नी को प्रतिमाह चार हज़ार रुपये गुजारा भत्ता देने के फैमिली कोर्ट ऊना के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति योगेश जसवाल की खंडपीठ ने मनीष कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसे अपनी पत्नी को हर महीने चार हज़ार रुपये भरण-पोषण के लिए देने को कहा गया था। पति ने अदालत में अपनी कम आमदनी और पत्नी की नौकरी का ...