नई दिल्ली, जनवरी 8 -- शादी के बाद गुजारा भत्ता का मामला अक्सर विवादों में घिर जाता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि अंतरिम भत्ता तय करते समय पत्नी को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि वह खुद कमाती है या खुद को संभाल सकती है। कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि बिना सबूत के पति का सिर्फ दावा करना काफी नहीं है।बिना सबूत के दावा खारिज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी एक महिला की याचिका पर की, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के सिर्फ 2,500 रुपये मासिक अंतरिम भत्ते के फैसले को चुनौती दी थी। पति ने दावा किया कि उनकी पत्नी नर्सरी टीचर हैं और कमाती हैं, लेकिन इसके लिए एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया। कोर्ट ने पत्नी की सिर्फ 11वीं तक की पढ़ाई का हवाला देते हुए कहा, 'बिना प्रमाण के ऐसा खोखला दावा इस स्टेज पर किसी काम का नहीं। अंतरिम भत...