प्रयागराज, जनवरी 23 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई पत्नी या उसके मायके वाले कोई ऐसा कार्य करते है जिससे पति कमाने में असमर्थ हो जाए तो पत्नी उस पति से भरण पोषण देने का दावा नहीं कर सकती है। कुशीनगर की विनीता की पुनरीक्षण याचिका खारिज़ करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ल ने दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में मेंटेनेंस देना गंभीर अन्याय होगा, खासकर जब पति की कमाने की क्षमता पत्नी के परिवार के आपराधिक कामों से खत्म हो गई हो। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में यह माना जाता है कि एक पति से, भले ही उसके पास नियमित रोजगार न हो, उम्मीद की जाती है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार खुद और अपने परिवार का पेट पालने के लिए कोई काम करे, लेकिन यह मामला अलग था। कोर्ट ने कहा कि पहले, दूसरी पार्टी अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में सक्षम थी और उसके...
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