नई दिल्ली, जुलाई 12 -- -कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक जमीन पर निजी हक नहीं दिया जा सकता नई दिल्ली। साकेत जिला अदालत ने शाहीन बाग कब्रिस्तान में पत्नी की कब्र को दोबारा इस्तेमाल से रोकने की मांग करने वाले व्यक्ति की अपील खारिज कर दी। जिला न्यायाधीश अतुल अहलावत की अदालत ने कहा कि सार्वजनिक कब्रिस्तान की सीमित जमीन पर किसी एक व्यक्ति को विशेष या स्थायी अधिकार नहीं दिया जा सकता।

याचिका का विवरण अदालत ने माना कि निचली अदालत ने कानून और तथ्यों का सही आकलन किया था, इसलिए उसके आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। याचिकाकर्ता एम. बशारत हुसैन ने अपनी अपील में कहा था कि उनकी पत्नी को अप्रैल 2021 में शाहीन बाग कब्रिस्तान में दफनाया गया था। उनका तर्क था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार जब तक शव पूरी तरह मिट्टी में नहीं मिल जाती, तब तक कब्र को दोबारा नही...