प्रयागराज, मई 13 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ इस बात से कि पत्नी पढ़ी-लिखी है या उसमें कमाने की क्षमता है, उसे सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद ने कहा कि जिस बात पर विचार किया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या उसमें खुद का भरण-पोषण करने की वास्तविक और मौजूदा क्षमता है। वह भी उसी जीवन-स्तर के अनुसार, जिसका वह अपने वैवाहिक घर में आनंद लेती थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि वह किसी लाभकारी रोजगार में है और खुद का गुजारा करने के लिए पर्याप्त कमा रही है, तब तक पति अपनी कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता。 यह भी पढ़ें- कमाने में सक्षम होने पर भी क्या गुजारा भत्ता मांग सकती है पत्न...