नई दिल्ली, अप्रैल 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पति का अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने का दायित्व एक प्राथमिक और निरंतर कर्तव्य है और इसे इस तरह से निभाया जाना चाहिए जिससे पत्नी गरिमापूर्ण जीवन जी सके। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि भरण-पोषण निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों की सामाजिक स्थिति तथा पति की आर्थिक क्षमता के अनुरूप होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि भरण-पोषण राशि का निर्धारण निष्पक्ष और उचित हो, और इससे पति पर कोई अत्यधिक बोझ न पड़े। इस प्रक्रिया का उद्देश्य विभिन्न प्रतिस्पर्धी पहलुओं के बीच एक उचित संतुलन स्थापित करना है। यह भी पढ़ें- पीरियड लीव कोई एहसान नहीं, महिलाओं का हक है; हाईकोर्ट की दो टूक; बराबरी का असली मतलब भी समझाया शीर्ष अदालत की ये ...
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