प्रयागराज, मार्च 23 -- Prayagraj News: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पति या पत्नी की मृत्यु के बाद एक पक्षीय तलाक की डिक्री को रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में मुकदमा आगे नहीं बढ़ सकता और इसे पुनर्जीवित करना कानूनन संभव नहीं है। गीता देवी व अन्य बनाम माया देवी व अन्य के मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने परिवार न्यायालय का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें 30 साल पुराने तलाक को बहाल कर दिया गया था। मामले में पहली पत्नी का विवाह 1991 में एक पक्षीय डिक्री के जरिए समाप्त हो गया। इसके बाद पति ने दूसरी शादी कर ली और अलग परिवार के साथ रहने लगा। वर्ष 2023 में पति की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को वैध विधवा मानते हुए उसे सभी सेवा लाभ दिए गए। इसके बाद पह...