नई दिल्ली, अक्टूबर 8 -- किताब खुली है। आंखें पन्ने पर टिकी हैं। पर मन कहीं और है। कभी फोन की स्क्रीन पर कभी किसी मैसेज के जवाब में। घंटा भर बीत जाता है और एक पन्ना भी दिमाग में नहीं उतरता। आज लाखों विद्यार्थी यही शिकायत करते हैं कि पढ़ाई में मन नहीं लगता। संत प्रेमानंद महाराज की एक सीख इस परेशानी की जड़ पर सीधी उंगली रखती है। उनका कहना है कि जब एकाग्रता चाहिए तब दो काम एक साथ नहीं हो सकते। यह बात भजन मार्ग के एक वीडियो में सामने आई। इसे 14 अप्रैल 2025 को साझा किया गया था। सवाल एक श्रोता का था। उसने पूछा कि रोज आठ से दस घंटे दफ्तर में काम करते हुए भगवान को कैसे याद रखें। महाराज ने जवाब दिया कि जिस काम में ध्यान चाहिए उसमें पूरा मन झोंक दो।असली दिक्कत मन की कमजोरी नहीं बंटवारा है उनके मुताबिक लिखना हो पढ़ना हो या बोलना हो अपना सारा मन उसी म...