पंडित राजकुमार शुक्ल के जीवन का प्रत्यक्ष दस्तावेज है नील नायक
बगहा, मई 21 -- बेतिया, बेतिया कार्यालय हम विदेशों का इतिहास तो पढ़ लेते हैं, हम दूसरी सभ्यताओं की जानकारी तो कर लेते हैं; लेकिन स्थानीय महापुरुषों के बारे में नहीं जानते। अगर हमने अपने महापुरुषों के बारे में आने वाली पीढ़ी को नहीं बताया तो फिर इतिहास से मिटते देर नहीं लगेगी। यह हमारी अस्मिता का प्रश्न है कि हम अपने महापुरुषों को किस रूप में याद करते हैं। राजकुमार शुक्ल भी आजादी की लड़ाई के ऐसे ही नायक हैं, जिन्हें इतिहास के पन्नों में स्थान नहीं मिला। जबकि सच्चाई यह है कि गांधी जी को महात्मा बनाने वाले अगर कोई थे, वे राजकुमार शुक्ल थे। उपर्युक्त बातें पूर्व क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ब्रजेश ओझा ने कही। वे सेराजेम के सभागार में प्रसिद्ध नाटककार और चम्पारन साहित्य संस्थान के संयोजक डॉ दिवाकर राय की पुस्तक 'नील नायक' के लोकार्पण समारोह में उपस्...
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