वाराणसी, अक्टूबर 2 -- पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र को याद करते हुए वाराणसी निवासी दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर सुनील मिश्र कहते हैं कि कोरोना काल में समाज में हर ओर नकारात्मकता का वातावरण था, तब काशी में मेरे द्वारा "गुरुवारी अड़ी" नाम से एक डिजिटल कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था। विधान परिषद सदस्य धर्मेन्द्र राय के माध्यम से जब पंडित जी से इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने का अनुरोध किया गया, तो प्रारंभ में उन्होंने ऑनलाइन माध्यम के प्रति अपनी अनभिज्ञता जताई किंतु बाद में हम सभी के आग्रह पर वे तैयार हो गए। उन्होंने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र ने अपनी विशिष्ट गायन शैली और अक्खड़ स्वभाव से डिजिटल मंच पर ऐसा सांस्कृतिक वातावरण निर्मित किया कि संपूर्ण काशी क्षेत्र उनके संगीत से मंत्रमुग्ध हो उठा और समाज में सकारात्मकता का संचार हुआ...
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