छपरा, मार्च 3 -- मांझी प्रखंड के आदर्श ग्राम बरेजा की पवित्र धरती भारत के स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला को संजोए हुए है, जहाँ के महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित गिरीश तिवारी ने नमक सत्याग्रह से लेकर अगस्त क्रांति तक अंग्रेजी शासन के विरुद्ध अग्रिम पंक्ति में संघर्ष किया। 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी द्वारा साबरमती से दांडी तक किए गए नमक सत्याग्रह की गूंज बिहार के सारण तक पहुँची, और इसी आंदोलन को गति देने में पं. तिवारी की भूमिका सबसे प्रमुख रही। उन्होंने गांधी जी के संदेश को जन-जन तक पहुँचाते हुए नमक कानून के विरोध में व्यापक आंदोलन खड़ा किया। इसी अवधि में पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और विनोबा भावे जैसे राष्ट्रीय नेता भी सारण पहुँचे। उनके आवास पर आंदोलनकारियों ने मिट्टी से लोनी निकालकर नमक बनाया और अंग्रेजी कानून को खुली चुनौत...