चंडीगढ़, जनवरी 15 -- सालों से पंजाब में कुत्ते के काटने के परिणाम एक जख्म से कहीं अधिक गंभीर होते थे। हर साल कुत्तों के काटने के लगभग तीन लाख मामले सामने आते हैं, जिससे हजारों परिवारों पर रेबीज़ का खतरा बना रहता है। यदि इसका इलाज न किया जाए तो यह बीमारी 100 प्रतिशत घातक होती है, लेकिन समय पर टीकाकरण से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। पहले एंटी-रेबीज़ टीकाकरण (एआरवी) केवल 48 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ही उपलब्ध था, जिस कारण पीड़ितों, जिनमें अक्सर बच्चे, बुजुर्ग और रोज़ाना मज़दूरी करने वाले कामगार होते हैं, को घरों से दूर जाना पड़ता था, घंटों इंतज़ार करना पड़ता था, उनकी मजदूरी का नुकसान होता था और कई मामलों में ज़रूरी पाँच खुराकों वाले टीकाकरण शेड्यूल को बीच में छोड़ना पड़ता था। यह व्यवस्था प्रणालीगत थी और कीमती मानव जीवन पर इसका जोखिम ग...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.