इटावा औरैया, जून 20 -- इटावा। पुराने शहर छैराहा पर छोटी सी दुकान, बोर्ड पर लिखा साइकिल पंचर की दुकान। धूप में बैठकर पंचर जोड़ने वाले घनश्याम गौड़ के पास न बड़ी डिग्री थी, न बड़ी पूंजी। था तो बस 4 बेटों को काबिल बनाने का जुनून। बेटे संजय गौड़ इटावा में ही माता पिता की सेवा के साथ प्लास्टिक फर्नीचर का काम संभाल रहे है। आकाश गौड़ चंडीगढ़ में मैकेनिकल इंजीनियर है जबकि प्रभात गौर ऑस्ट्रेलिया में अपना रेस्टोरेंट चला रहे है। सबसे छोटे बेटे विकास गौड़ लखनऊ में रिकवरी एजेंट का कामकाज देखते है। साइकिल के ट्यूब जोड़ते-जोड़ते घनश्याम ने बेटों के सपने जोड़े। यह भी पढ़ें- खुद को तपा कर अपने पाल्यों को पहुंचाया बुलंदियों पर सुबह पंचर, शाम को बच्चों की कॉपी-किताब। ग्राहक 10-20 रुपये देता था, वो 2000 की फीस में लगा देता था।आज एक बेटा इंजीनियर बनकर चंडीगढ़ में...