हरिद्वार, मई 1 -- हरिद्वार, संवाददाता। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय पंचकर्म एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला के पांचवें दिन प्रतिभागियों को पारंपरिक उपचार पद्धतियों का गहन प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में संजीवनी क्रिया योग ऋषिकुल के निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने बस्ति, अग्निकर्म, अभ्यंग और शिरोधारा जैसी प्रमुख पंचकर्म विधियों का सैद्धांतिक और प्रायोगिक प्रदर्शन कर विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में दिल्ली से आईं कुमारी ऋतु त्यागी ने प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नियमित दिनचर्या और ऋतुचर्या का पालन करने से शरीर स्वतः शुद्ध होता है और व्यक्ति कई जटिल रोगों से भी बच सकता है। बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा पंचमहाभूत आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी पर आधारित पद्धति है, जो शरीर में इन तत्वों क...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.