देहरादून, मई 7 -- सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के एक दिवसीय श्रमिक कन्वेंशन में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका गया। सीटू ने श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने की पुरजोर मांग उठाई। प्रेस क्लब में आयोजित कन्वेंशन में मुख्य वक्ता के रूप में सीटू के राष्ट्रीय महामंत्री व पूर्व सांसद अलाराम करीम ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने आपदा को अवसर में बदलते हुए महामारी के दौरान मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं पास कराईं। उन्होंने कहा कि केरल में न्यूनतम वेतन पूरे भारत में सबसे अधिक है और उत्तराखंड में भी इसे लागू कराने के लिए श्रमिकों को संगठित होना होगा। करीम ने मांग की कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन Rs.26,000 घोषित किया जाए। आरोप लगाया कि 20 नवंबर 2025 को श्रम संहिताएं लागू करने की घोषणा के बाद से श्रमि...