रांची, अप्रैल 25 -- रांची, विशेष संवाददाता। संविधान महिलाओं को समानता, भेदभाव से मुक्ति और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है। लेकिन इन अधिकारों और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अब भी बड़ा अंतर है। महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज की गहरी संरचनात्मक समस्या का परिणाम हैं, जहां हिंसा को सामान्य मान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने शनिवार को ज्यूडिशियल एकेडमी में यह बात कही। वह महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों और झारखंड में डायन जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आयोजित कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। जस्टिस नाथ ने झारखंड में प्रचलित डायन प्रथा को अमानवीय और लैंगिक हिंसा का गंभीर रूप बताया। कहा कि यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता, सत्ता और पितृसत्ता से जुड़ा विषय है। इस पर प्रभावी र...