नई दिल्ली, मार्च 9 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुकदमों के तेजी से निपटारा करने और त्वरित न्याय देने के लिए गठित विभिन्न न्यायाधिकरणों को सरकारी नियंत्रण में नहीं छोड़ा सकता है, इससे तीखी आलोचना होगी। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को राहत देते हुए उन न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल 8 सितंबर, 2026 तक बढ़ाने की इजाजत देते हुए यह टिप्पणी की है, जिनका कार्यकाल जल्द खत्म होने वाला है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 'न्यायाधिकरणों को सरकारी नियंत्रण में नहीं छोड़ा सका है क्योंकि इससे तीखी आलोचना होगी। पीठ ने सरकार से कहा कि आप न्यायाधिकरणों को न्यायिक नियंत्रण में भी नहीं रख सकते, ऐसे में सवाल उठता है कि फिर कहां? पीठ के कहा कि ऐसे में एक ठोस कानून होना चाहिए ता...