मुंबई, नवम्बर 5 -- भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई ने बुधवार को कहा कि लोकतंत्र के सभी अंग कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका - नागरिकों की भलाई के लिए हैं और कोई भी अलग-थलग होकर काम नहीं कर सकता। मुंबई में महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एमएनएलयू) परिसर में एक समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि स्वतंत्रता, न्याय और समानता के सिद्धांत हमारे संविधान में सन्निहित हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'न्यायपालिका के पास न तो तलवार की ताकत है और न ही शब्दों की। जब तक कार्यपालिका इसमें शामिल नहीं होगी, न्यायपालिका के लिए न्यायपालिका को पर्याप्त बुनियादी ढांचा और कानूनी शिक्षा प्रदान करना मुश्किल है।' न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि विधि शिक्षा अब अधिक व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ विकसित हो रही है और इसलिए बुनियादी ढ...