न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, सितम्बर 9 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं है और न ही हो सकती है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऐसी आलोचना सही मंच पर और निष्पक्ष व तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने तब की, जब वे कक्षा 8 की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के ज़िक्र से जुड़ी स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही को बंद कर रहे थे। शीर्ष अदालत ने कहा कि फर्क आलोचना और चुप्पी के बीच नहीं, बल्कि जिम्मेदार बातचीत और बिना जानकारी के किए गए दावों के बीच है। यह भी पढ़ें- 'कानूनी शिक्षा के लिए विशेषज्ञ निकाय की जरूरत' एक संस्था के तौर पर न्यायपालिका आलोचना के खिलाफ नहीं है और न ही हो सकती है। हालांकि, जरूरी यह है कि ऐसी आलोचना सही मंच क...
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