नई दिल्ली, अगस्त 16 -- मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के एक छोटे से गांव दगडुआ में एक लड़की के सपनों में सिविल सेवा की वर्दी नहीं बल्कि जज्बा था। उसे नहीं पता था कि यह सपना उससे पांच साल की मेहनत, बार-बार की नाकामी और एक बार तो महज अठारह नंबर की दूरी मांगेगा। आज वही लड़की, देश की सबसे कठिन परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 56 लेकर खड़ी है और उसकी कहानी हर उस अभ्यर्थी के लिए एक सबक है जो बार-बार गिरकर भी उठने की हिम्मत रखता है। जी हां हम बात कर रहे हैं समीक्षा द्विवेदी की जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में कड़ी महेनत करते हुए इस मुकाम को हासिल किया है।घर से मिली पढ़ाई की तमीज समीक्षा का परिवार शुरू से पढ़ाई-लिखाई को अहमियत देने वाला रहा है। उनके पिता श्रीनिवास द्विवेदी भोपाल में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर कार्यरत है...