नई दिल्ली, जून 1 -- खेती में बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति के बीच नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए एक नया और उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन उर्वरकों का संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने पर किसानों को लागत कम करने, बेहतर उत्पादन हासिल करने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ समेत देश के अधिकांश धान उत्पादक क्षेत्रों में किसान प्रति एकड़ दो से तीन बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी का उपयोग करते हैं। मौजूदा कीमतों के आधार पर केवल इन उर्वरकों पर ही प्रति एकड़ लगभग 1,900 से 2,200 रुपये तक का खर्च आता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल का प्रभाव पारंपरिक यूरिया की एक बोरी के बराबर माना जाता है। यदि किसान ...