लखनऊ, जून 16 -- अविनाश त्रिपाठी, बलरामपुर। जहाँ एक तरफ गहरी नीरवता है और दूसरी तरफ सरोवर का अनंत विस्तार, ठीक उन दोनों के बीच एक पीपल की छांव तले विराजते हैं संकटमोचन हनुमान। न भव्य शिखर, न विशाल प्रांगण, फिर भी डेढ़ सदी से यहाँ आस्था का जो दीप जल रहा है, वह आज नेपाल की सीमाओं तक अपनी रोशनी बिखेर रहा है। यही है बलरामपुर के रानी तालाब स्थित वह हनुमान मंदिर, जिसे लोग चमत्कारी भी कहते हैं और स्वयंसिद्ध भी, क्योंकि यहाँ जो माँगा जाता है, वह मिलता जरूर है। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर को छोटी काशी यूं ही नहीं कहा जाता। इस प्राचीन नगर की गलियों में इतिहास सांस लेता है। नीलबाग महल हो, राजा की ड्योढ़ी हो या सदियों पुराने शिवालय, हर ओर गौरवशाली अतीत की छाप है। लेकिन इन सबके बीच रानी तालाब का हनुमान मंदिर अपनी एक अलग ही पहचान रखता है, जहाँ धर्म, प्रकृत...