जमशेदपुर, फरवरी 26 -- गोलमुरी मनिंदर टावर में चल रही भागवत कथा के सातवें दिन बुधवार को आचार्य पंडित सुरेश चन्द्र शास्त्री जी महाराज ने सुदामा चरित्र, कुरुक्षेत्र लीला, श्री कृष्ण-उद्धव संवाद, भगवत कथा सार और कथा विश्राम का वर्णन किया। कृष्ण और सुदामा की मित्रता की महिमा का गुणगान करते हुए आचार्य ने कहा कि सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए सुदामा ने भगवान के पास होते हुए भी अपने लिए कुछ नहीं मांगा। अर्थात निस्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है। कृष्ण ने बिना कहे ही उनकी दरिद्रता दूर कर दी और उन्हें धन-धान्य से परिपूर्ण कर दिया। आचार्य ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में मित्र का साथ देना ही मित्रता का सच्चा धर्म है। मित्र वह है जो अपने मित्र को सही दिशा प्रदान करे, उसकी गलती पर ...