गंगापार, सितम्बर 1 -- मेजा, हिन्दुस्तान संवाद। निषाद पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता तहसील मुख्यालय पहुंच प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र लेखाकार संजय श्रीवास्तव को सौंप बताया कि अंग्रेजों के काले कानून ने 1871 में उनकी जाति को जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया था, भारत सरकार ने इस काले कानून को 31 अगस्त 1952 को निरस्त कर विमुक्त जनजाति घोषित कर दिया था।1931 की जनगणना के अनुसार केवट, मल्लाह, निषाद, बिन्द, मंझवार, कश्यप, तुरैह, माझी,रेकवार आदि सभी एक ही वंश की पर्यायवाची हैं। इन सभी को अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है,किसी राज्य में एससी तो किसी राज्य में पिछड़ी जाति रखा गया है, जो घोर अन्याय है। यह भी पढ़ें- निषाद पार्टी ने समस्याओं को लकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा यह भी पढ़ें- Chandauli News: निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने क...