नई दिल्ली, जून 24 -- युधिष्ठिर ने व्यासजी से कहा- ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है, इसका नाम क्या है और इस दिन कैसे व्रत करना चाहिए। लेकिन भीम ने कहा मुझसे एकादशी व्रत नहीं होता है। क्या आप मुझे कोई ऐसा उपाय बता सकते हैं कि व्रत भी हो जाए और मुझे भूखा भी ना रहना पड़े। भीमसेन की बात सुनकर व्यासजीने कहा यदि तुम्हें स्वर्गलोक की प्राप्ति अभीष्ट है और नरक को दूषित समझते हो तो दोनों पक्षों की एकादशीको भोजन न करना । भीमसेन बोले-मैं आपके सामने सच्ची बात कहता हूं एक बार भोजन करके भी मुझसे ब्रत नहीं किया जा सकता। फिर उपवास करके तो मैं रह ही कैसे सकता हूं। मेरे उदरमें भूख नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है, जो तभी शांत होती है जब मैं अधिक से अधिक खाना खाता हूं। इसलिए महामुने, मैं सिर्फ साल में केवल एक ही उपवास कर सकता हूं. जिससे स्वर्गकी...