प्रयागराज, जनवरी 23 -- प्रयागराज, संवाददाता। महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती के अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर स्थित उनके प्रतिमास्थल पर शिक्षकों, विद्यार्थियों व साहित्यप्रेमियों ने एकत्र होकर स्मरण किया। इस मौके पर निराला साहित्य के अध्येता डॉ. राजेंद्र कुमार का न होने का दुख भी लोगों को हुआ। प्रो. कुमार वीरेंद्र ने कहा कि निराला को पढ़ना साहित्य की एक महान परंपरा से जुड़ना है। निराला के यहां स्वाधीनता का अर्थ निर्भयता से है जो हमेशा शक्ति, अन्याय व जड़ता के खिलाफ रहे। मानव मूर्ति ने निराला पर केंद्रित राजेंद्र कुमार की कविता 'निराला का दृष्टिदान' का पाठ किया। हिन्दी विभाग के प्रो. आशुतोष पार्थेश्वर ने वर्तमान समय में निराला को पढ़ने की प्रासंगिकता पर बात की तो डॉ. दीनानाथ मौर्य ने निराला के काव्य के साथ उनके गद्य की म...