नई दिल्ली, जुलाई 29 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि गलत तरीके से किसी न्यायिक अधिकारी को सेवा से हटाने के बाद दोबारा बहाल किया जाता है, तो केवल इस वजह से उसे लाभों से वंचित नहीं कर सकते कि उक्त अवधि की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) उपलब्ध नहीं है। शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि कोई नियोक्ता अपनी ही गलत कार्रवाई का फायदा नहीं उठा सकता। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से दायर एक आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिया। आवेदन में यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया था कि क्या शीर्ष अदालत के वर्ष 2022 के उस आदेश के तहत, जिसमें राजस्थान के न्यायिक अधिकारी अभय जैन को बहाल किया गया था, उन्हें उच्च वेतनमान का लाभ भी मिलेगा, जबकि सेवा से बाहर रहने के छह वर्षों की अवधि की एसीआर उपलब्ध नहीं है।...